नैनीताल, संवाददाता। माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाने वाला बसंत पंचमी पर्व इस वर्ष 23 जनवरी शुक्रवार को मनाया जाएगा।
आचार्य पंडित प्रकाश जोशी ने बताया कि बसंत पंचमी पूरे देश में मनाई जाती है, लेकिन कुमाऊं संभाग में इसे ‘श्री पंचमी’ के रूप में विशेष परंपराओं के साथ मनाया जाता है। इस दिन खेतों से लाई गई जौ की पत्तियां स्नान के बाद मंदिरों में अर्पित की जाती हैं और घरों में हरेले की तरह एक-दूसरे को पूजी जाती हैं। बालिकाएं परिजनों के सिर में जौ पूजती हैं तथा इस दिन नाक-कान छिदवाने की परंपरा भी प्रचलित है।
इस दिन पंचमी तिथि मध्यरात्रि 1:46 बजे तक रहेगी। पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र दोपहर 2:33 बजे तक, परिधि योग शाम 3:59 बजे तक रहेगा। चंद्रमा प्रातः 8:30 बजे तक कुंभ राशि में रहेंगे जिसके बाद में मीन राशि में प्रवेश करेगा।
श्री पंचमी से ही कुमाऊंनी बैठकी होली का शुभारंभ होता है, जो फाल्गुन शुक्ल एकादशी (आंवला एकादशी) तक चलती है। कुमाऊं के कई क्षेत्रों में इस दिन यज्ञोपवीत, चूडाकर्म, बच्चों की शिक्षा आरंभ, अन्नप्राशन जैसे संस्कार भी कराए जाते हैं। छोटे बच्चों की जीभ पर शहद से ॐ लिखने की परंपरा ज्ञान-वृद्धि से जोड़ी जाती है। इस दिन माँ सरस्वती की पूजा पीले वस्त्र व पीले पुष्पों के साथ की जाती है। मान्यता है कि इससे बुद्धि, विद्या और कला में उन्नति होती है।
कुमाऊं में विशेष परंपराओं के साथ मनाई जाती है श्री पंचमी (बसंत पंचमी),जौ की पत्तियां पूजने की है परंपरा।