आम्रपाली विवि में मुख्यमंत्री ने किया ‘शेफ संवाद’,उत्तराखण्ड के पारंपरिक भोजन को वैश्विक पहचान दिलाने पर मंथन।

हल्द्वानी, 17 जनवरी।
उत्तराखण्ड के विख्यात आम्रपाली विश्वविद्यालय के होटल प्रबंधन विभाग ने शनिवार को ‘शेफ संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने ऑनलाइन माध्यम से प्रदेश के प्रमुख शेफों एवं आम्रपाली विश्वविद्यालय में अध्ययनरत प्रशिक्षु शेफों से संवाद किया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य उत्तराखण्ड के श्रीअन्न एवं पारंपरिक भोजन को बढ़ावा देना, स्थानीय उत्पादों के उपयोग को प्रोत्साहित करना तथा वैश्विक स्तर पर उत्तराखण्डी व्यंजनों के प्रचार-प्रसार की रणनीति पर विचार-विमर्श करना रहा।कार्यक्रम के मुख्य समन्वयक डॉ. विनोद सिंह नेगी ने बताया कि संवाद में उत्तराखण्ड के प्रमुख होटलों से जुड़े शेफों ने भाग लिया, जिनमें आनंदा होटल ऋषिकेश के शेफ दिवाकर बलोदी, आईटीसी फॉर्च्यून हल्द्वानी के शेफ कुंदन सिंह, रेडिसन होटल नैनीताल की शेफ शिवांगी पवार, गोल्डन टस्क होटल रामनगर के शेफ शांति प्रसाद, द चेमोलिन होटल भीमताल के शेफ किशोर नेगी, आईएचजी वोको रामनगर के शेफ संदीप जुयाल, सराका रिजॉर्ट रामनगर के शेफ सुबोध उपाध्याय, रेडिसन होटल रुद्रपुर के शेफ अनुराग श्रीवास्तव एवं बेकरी शेफ वर्मित विज शामिल रहे। इसके साथ ही आम्रपाली विश्वविद्यालय के प्रशिक्षु शेफ भी कार्यक्रम का हिस्सा बने।

परिचर्चा के कोऑर्डिनेटर डॉ. एस.के. सिंह ने उत्तराखण्ड की संस्कृति एवं पारंपरिक खान-पान की विशेषताओं को रेखांकित करते हुए संवाद की शुरुआत की। परिचर्चा के दौरान शेफों ने मुख्यमंत्री से होटल मेन्यू में उत्तराखण्डी व्यंजन शामिल करने, मक्का, मडुवा, झंगोरा, भट्ट जैसे स्थानीय उत्पादों की उपलब्धता, बड़े आयोजनों में पारंपरिक भोजन की प्रस्तुति, उत्पादों की प्रोसेसिंग व निर्यात, शुद्धता के मानक तय करने, फूड ट्रेल्स और बाजार विकसित करने, आतिथ्य उद्योग से जुड़े स्टार्ट-अप को बढ़ावा देने जैसे विषयों पर प्रश्न किए।मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश के शेफ अपने होटल मेन्यू में उत्तराखण्डी व्यंजनों और स्थानीय मसालों को अनिवार्य रूप से शामिल करें। उन्होंने बताया कि कई बड़े शहरों में स्थित उत्तराखण्ड भवनों में स्थानीय उत्पादों की बिक्री हो रही है तथा युवा उद्यमी ऑनलाइन माध्यम से भी इन उत्पादों को उपलब्ध करा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जी-20 सम्मेलन, राष्ट्रीय खेल जैसे बड़े आयोजनों में उत्तराखण्डी व्यंजनों को सराहा गया है, जिससे प्रदेश की पाक-संस्कृति को नई पहचान मिली है।

उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों की प्रोसेसिंग और निर्यात “सबका साथ-सबका विकास” की भावना से ही संभव है। सरकार किसानों और कारोबारियों को जोड़ने के लिए अनुकूल वातावरण, आसान ऋण, सब्सिडी, सिंगल विंडो क्लीयरेंस और स्किल ट्रेनिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। मुख्यमंत्री ने युवाओं से आह्वान किया कि वे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप खाद्य स्टार्ट-अप विकसित करें और उत्तराखण्डी रसोई को वैश्विक मंच तक पहुंचाएं।

महिला शेफों द्वारा छात्रवृत्ति एवं फेलोशिप से जुड़े प्रश्नों पर मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि पर्यटन विभाग के माध्यम से शेफ छात्राओं के लिए योजनाएं तैयार की जाएंगी। उन्होंने पारंपरिक रेसिपी को संरक्षित करने और रेसिपी बुक तैयार करने पर भी जोर दिया।

प्रशिक्षु शेफों से संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें स्वयं मां के हाथ का बना पारंपरिक उत्तराखण्डी भोजन अत्यंत प्रिय है और उनके अतिथियों को भी उत्तराखण्डी थाली परोसी जाती है। उन्होंने कहा कि पहाड़ का श्रीअन्न, दालें और सब्जियां स्वास्थ्य व ऊर्जा का भंडार हैं, जिन्हें पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाना आवश्यक है।

इस अवसर पर होटल प्रबंधन विभाग, आम्रपाली विश्वविद्यालय की कॉफी टेबल बुक “Roots of the Ridge: A Journey Through Cuisine, Culture and Tradition of Uttarakhand” का विमोचन भी किया गया।

कार्यक्रम के अंत में आम्रपाली विश्वविद्यालय के सीईओ डॉ. संजय ढींगरा ने मुख्यमंत्री एवं सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर कालाढूंगी विधायक बंशीधर भगत, हल्द्वानी-काठगोदाम नगर निगम के महापौर गजराज सिंह बिष्ट, जिलाधिकारी नैनीताल ललित मोहन रयाल, विश्वविद्यालय प्रबंधन, जिला प्रशासन के अधिकारी, शिक्षकगण एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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