इस अवसर पर निदेशक प्रो. संजय पंत ने कहा कि गांधी की अहिंसा की शक्ति ने देश को स्वतंत्रता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और पूरे विश्व को अहिंसा की शक्ति पहचानने का संदेश दिया। प्रो. हरीश बिष्ट ने गांधी के दृढ़ निश्चय को उनके जीवन की महत्वपूर्ण विशेषता बताया।
प्रो. सावित्री कैड़ा ने कहा कि महात्मा गांधी 21 दिन कुमाऊं में रहे और इस दौरान 25 स्थानों पर भाषण दिए। उनकी सरलता और विचारों ने कुमाऊं में स्वतंत्रता आंदोलन को और गति प्रदान की।
कार्यक्रम में श्वेता पंत, पूजा टम्टा, दीप्ति और रिया ने गांधी एवं शास्त्री के जीवन और विचारों पर अपने विचार रखे। वैभवी एवं समूह ने गांधीजी का प्रिय भजन प्रस्तुत किया। संगीत विभाग की टीम ने डॉ. रवि जोशी के नेतृत्व में डॉ. अलंकार महतोलिया, दिया, प्रगति, नवल और वंश के साथ ‘वैष्णव जन तो’, ‘पायो जी मैंने राम रतन धन पायो’ और ‘रघुपति राघव राजा राम’ भजनों की मनमोहक प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम का संचालन वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. ललित तिवारी ने किया। उन्होंने गांधी और शास्त्री के जीवन वृत्त पर प्रकाश डालते हुए गांधी दर्शन की चर्चा की। उन्होंने कहा कि व्यक्ति अपने विचारों से निर्मित होता है और वह जैसा सोचता है, वैसा ही बनता है। गांधीजी के सत्य और अहिंसा के विचारों को जीवन का सार बताते हुए उन्होंने कहा कि गांधी के लिए सत्य भगवान था और अहिंसा उसे पाने का साधन। कार्यक्रम के अंत में मिष्ठान वितरण किया गया।
इस अवसर पर प्रो. मनोज कुमार आर्य, डॉ. अशोक कुमार, डॉ. मनोज बिष्ट, डॉ. हृदेश शर्मा, डॉ. कुबेर, डॉ. संध्या, डॉ. नवीन पांडे, डॉ. दिव्या पांगती, नंदा बल्लभ पालीवाल, विपिन कुमार, देवेंद्र बिष्ट, कुंदन, लाल सिंह, नवीन पालीवाल, डॉ. हर्ष वर्धन, डॉ. नगमा परवीन सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, कर्मचारी, छात्रावासों के विद्यार्थी और एनसीसी कैडेट मौजूद रहे।