नैनीताल। शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से प्रारंभ हो रहे हैं। ज्योतिषाचार्य पंडित प्रकाश जोशी के अनुसार, इस वर्ष नवरात्र रविवार से शुरू होने के कारण धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां दुर्गा का आगमन हाथी पर होगा। नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना के साथ मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी। इसके बाद नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की आराधना होगी।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्र के प्रारंभ होने वाले दिन के आधार पर माता के आगमन के वाहन का निर्धारण किया जाता है। देवी भागवत पुराण में माता के विभिन्न वाहनों का उल्लेख मिलता है। इस संबंध में प्रचलित श्लोक है ‘शशि सूर्य गजरूढ़ा, शनिभौमे तुरंग मे। गुरौशुक्रे च दोलायां, बुधे नौका प्रकीर्तिता।’
इस मान्यता के अनुसार, सोमवार या रविवार को नवरात्र प्रारंभ होने पर माता का वाहन हाथी, शनिवार या मंगलवार को घोड़ा, गुरुवार या शुक्रवार को डोली तथा बुधवार को नौका मानी जाती है।
पंडित जोशी ने बताया कि नवरात्र के पहले दिन 11 अक्टूबर को प्रतिपदा तिथि रात 9:31 बजे तक रहेगी। चित्रा नक्षत्र रात 10:32 बजे तक और वैधृति योग रात 9:05 बजे तक रहेगा। कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6:19 से 10:12 बजे तक है। इस अवधि में कलश स्थापना नहीं कर पाने वाले श्रद्धालु सुबह 11:49 बजे से दोपहर 12:37 बजे तक अभिजीत मुहूर्त में भी स्थापना कर सकते हैं।
11 अक्टूबर को मां शैलपुत्री, 12 अक्टूबर को मां ब्रह्मचारिणी, 13 अक्टूबर को मां चंद्रघंटा, 14 अक्टूबर को मां कुष्मांडा, 15 अक्टूबर को मां स्कंदमाता, 16 अक्टूबर को मां कात्यायनी, 17 अक्टूबर को मां कालरात्रि, 18 अक्टूबर को मां महागौरी और 19 अक्टूबर को मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाएगी। इसके बाद 20 अक्टूबर को विजयादशमी का पर्व मनाया जाएगा।
इस बार हाथी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा, 11 अक्टूबर से 19 अक्टूबर तक होगी मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा, 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा विजयादशमी पर्व।