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नैनीताल। उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन (ऐक्टू) ने आशाओं को न्यूनतम वेतन, कर्मचारी का दर्जा, पेंशन और नियमितीकरण समेत विभिन्न मांगों को लेकर मंगलवार को तल्लीताल डाट पर प्रदर्शन किया और इसके बाद बीडी पांडे अस्पताल तक रैली निकलकर विरोध प्रदर्शन किया। यूनियन ने कहा कि मांगों का समाधान नहीं होने पर प्रदेशभर में अनिश्चितकालीन आंदोलन किया जाएगा।
यूनियन के अनुसार ऑल इंडिया स्कीम वर्कर्स फेडरेशन के आह्वान पर सितंबर माह की प्रत्येक मंगलवार को सीएचसी, पीएचसी और राजकीय अस्पतालों में धरना-प्रदर्शन कर मांगें उठाई जा रही हैं। यूनियन ने कहा कि आशाएं स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न अभियानों और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं, लेकिन उन्हें नियमित कर्मचारी का दर्जा और न्यूनतम वेतन नहीं दिया जा रहा है।
यूनियन ने वर्ष 2021 में खटीमा स्थित कैंप कार्यालय में हुई वार्ता का हवाला देते हुए कहा कि उस समय आशाओं के लिए 11,500 रुपये मासिक मानदेय लागू करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया है।
आशाओं ने सरकार से आशाओं को न्यूनतम वेतन और कर्मचारी का दर्जा देने, सेवानिवृत्ति पर 10 लाख रुपये की एकमुश्त राशि और आजीवन पेंशन देने, विभिन्न मदों का भुगतान हर महीने करने तथा प्रशिक्षण और पल्स पोलियो अभियान के दौरान प्रतिदिन 500 रुपये भुगतान की मांग की है।
इसके अलावा सरकारी अस्पतालों में आशाओं के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करने, विशेषज्ञ डॉक्टरों के रिक्त पद भरने, अस्पतालों में आशा घर बनाने, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का बजट बढ़ाने और आशाओं की छंटनी रोकने की मांग भी की गई है।
यूनियन ने चेतावनी दी कि विधानसभा चुनाव से पहले मांगों का समयबद्ध समाधान नहीं हुआ तो राज्य सरकार के खिलाफ प्रदेशव्यापी अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया जाएगा।
इस दौरान अध्यक्ष कमला कुंजवाल, दीपा पांडे, प्रेमा शाही, हेमा, खष्टी, प्रेमा अधिकारी, राधा, खिलावती, ऊषा, नीमा मेहरा, हेमा नेगी, भगवती बोहरा, विमला उप्रेती, नंदी देवी, माधवी, सुनीता, रश्मि राणा, तुलसी बिष्ट, नीलम, चंद्रा सती, नीरू पुजारी, रेनू, हेमा जोशी, मुन्नी, शांति पांडे, सरिता बिष्ट, ममता देवी, मुस्कान जोशी, रूपा देवी आदि मौजूद रहे।